Success Story Of IAS Topper Gautam Goyal: यूपीएससी की राह इतनी अनिश्चित्ता भरी है कि यहां सफलता की कोई गारंटी नहीं. सफलता कब मिलेगी और मिलेगी भी की नहीं कुछ नहीं कहा जा सकता. ऐसे में गौतम गोयल जैसे कुछ कैंडिडेट्स भी होते हैं, जिन्हें अपने सपने पर इस कदर भरोसा होता है कि वे अपना जमा-जमाया करियर और नौकरी छोड़कर इस कठिन राह पर चल पड़ते हैं. बहुत साहस चाहिए ऐसा फैसला लेने के लिए और यह साहस गौतम में कूट-कूटकर भरा था. आज जानते हैं गौतम से उनके इस फैसले के बारे में साथ ही आंसर राइटिंग टिप्स भी, जो उन्होंने दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में शेयर किए.

पिताजी से थे इंस्पायर –

गौतम ने बिट्स पिलानी से बीटेक किया और यहीं से फिजिक्स विषय में पीजी भी. पढ़ाई खत्म करने के बाद गौतम को बढ़िया प्लेसमेंट मिला और वे एक बड़ी कंपनी में अच्छे पैकेज पर काम करने लगे. हालांकि इसी बीच उन्हें अपने बचपन के सपने की सुध आयी और वे यूपीएससी की राह पर निकल पड़े. दरअसल गौतम के पिताजी सरकारी अफसर हैं और गौतम हमेशा से उनके जैसे ही पद पर आसीन होना चाहते थे. लेकिन दुनियादारी की समझ रखने वाले गौतम ये जानते थे कि इस क्षेत्र में कितनी अनिश्चित्ता है. इसलिए पहले उन्होंने अपने लिए एक और ऑप्शन बनाया, उसमें एक्सेल किया और फिर कैलकुलेटेड रिस्क लेते हुए इस क्षेत्र में आए. वे चाहते थे कि अगर यूपीएससी सीएसई में सफल न भी हो पाएं तो उनके हाथ खाली नहीं रहने चाहिए.

पहले अटेम्पट की गलती –

गौतम कहते हैं कि उनके पहले अटेम्प्ट की गलती यह थी कि पिछली बार उन्होंने आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर जरूरत भर का ध्यान नहीं दिया था. इस वजह से उनका मेन्स पेपर में सेलेक्शन नहीं हुआ था. ये तो थी गौतम की कमी की बात पर इस अटेम्प्ट की खास बात यह थी कि गौतम इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में 32वीं रैंक के साथ सेलेक्ट हो गए थे. जी हैं, गौतम यूपीएससी सीएसई में सफल नहीं हो पाए पर इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में उन्होंने टॉपर्स की सूची में जगह बनाई थी. इसके साथ ही उनके अटेम्प्ट की दूसरी खास बात यह रही कि वे पहले ही अटेम्प्ट में प्री परीक्षा पास कर गए थे, जिसे इस सफर की सबसे मुश्किल सीढ़ी माना जाता है. इसके बाद अगले ही साल गौतम ने यूपीएससी सीएसई परीक्षा भी 223वीं रैंक के साथ पास की और आईपीएस पद के लिए चुने गए.

देखें गौतम द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

ऐसे लिखें उत्तर –

गौतम आंसर राइटिंग के लिए टिप्स देते हुए कहते हैं कि सबसे पहले तो अपने उत्तरों को इंट्रोडक्शन, बॉडी और कॉन्क्लूजन यानी तीन हिस्सों में बांटकर लिखें और हर हिस्से की शुरुआत जितनी अच्छी हो सके करें. जो प्रश्न अधिक अंकों के हों, उनमें कोशिश करें कि कोई डायग्राम, टेबल, रिपोर्ट, स्टडी आदि जरूर लिखें और प्रेजेंटेशन को जितना हो सके अपीलिंग बनाने की कोशिश करें.

जो पूछा गया है उसी का जबाव दें, इधर-उधर की बातें न करें न ही विषय के आसपास भटकें बल्कि विषय पर ही रहें. यह भी देख लें कि प्रश्न के सभी हिस्सों को आपने कवर कर लिया है और जो पूछा गया है उसमें से कोई प्वॉइंट छूटा तो नहीं. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जो पूछा गया है वह बताएं न की वह जो आपको आता है.

इन बातों का रखें खयाल –

अंत में गौतम यही कहते हैं कि आप अपने आंसर को बहुत मन से लिख रहे हैं पर वह उतने ही मन से पढ़ा जाए यह जरूरी नहीं. इसलिए उसकी विजिबिलिटी बढ़ाएं. सबहेडिंग्स लिखें, कुछ जरूरी है तो उसे अंडरलाइन करें, हो सके तो उसका प्रेजेंटेशन ऐसा करें कि एग्जामिनर की नजर जरूर पड़े. कोई उत्तर लिखें और उसमें आपका व्यू पूछा गया हो या साधारण उत्तर भी लिख रहे हैं तो उसे डेटा, फैक्ट्स, रिपोर्ट्स आदि से बैक करें यानी अपने आंसर के सपोर्ट में फैक्ट्स पेश करें.

इसके साथ ही कुछ पेपरों में कोट्स और स्टोरी आदि के एग्जाम्पल के साथ अपनी बात कहें, यह अच्छा प्रभाव डालते हैं. आंसर राइटिंग प्रैक्टिस करें और उत्तर लिखने के बाद उसे दूसरों के उत्तरों से कंपेयर जरूर करें. चाहें तो कोई ऑनलाइन सर्विस ज्वॉइन कर लें जो आपके उत्तर चेक करके उनकी कमी बताए. इससे आप अपने उत्तरों को सुधार सकते हैं और उनकी क्वालिटी भी इम्प्रूव कर सकते हैं.

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