नई दिल्ली2 घंटे पहले

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नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने कहा- ‘कंपनी उपभोक्ताओं की सेहत का ध्यान रखती है। - Dainik Bhaskar

नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने कहा- ‘कंपनी उपभोक्ताओं की सेहत का ध्यान रखती है।

  • पहले एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि नेस्ले के 60% प्रोडक्ट जरूरी मानकों पर खरे नहीं उतरते

भारतीय बाजार में सबसे पसंदीदा फूड प्रोडक्ट मैगी एक बार फिर चर्चा में है। हाल में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि मैगी समेत नेस्ले के 60 फीसदी फूड प्रोडक्ट और ड्रिंक्स सेहतमंद नहीं है। अब नेस्ले ने खुद ही मान लिया है कि उसके वैश्विक प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में शामिल 30% प्रोडक्ट ‘अनहेल्दी’ श्रेणी में आते हैं।

ये प्रोडक्ट विभिन्न देशों के सख्त स्वास्थ्य मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के कुछ प्रोडक्ट ऐसे भी हैं, जो पहले हेल्दी नहीं थे और उन्हें सुधारने के बाद भी वे अनहेल्दी श्रेणी में ही रहे। किटकैट और मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने कहा- ‘कंपनी उपभोक्ताओं की सेहत का ध्यान रखती है।

अगले कुछ दिनों में कंपनी ग्राहकों से अपना जुड़ाव बढ़ा रही है।’ उन्होंने कहा, हाल में एक इंटरनल रिपोर्ट में नेस्ले के उत्पादों के हेल्दी होने पर सवाल उठाए गए थे। इस पोर्टफोलियो एनालिसिस में कंपनी की सिर्फ आधी वैश्विक बिक्री को शामिल किया गया था। इसमें प्रोडक्ट्स की कई प्रमुख श्रेणियां शामिल नहीं थीं।

हालांकि, प्रवक्ता ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि कंपनी के भारतीय पोर्टफोलियो में कितने प्रतिशत प्रोडक्ट्स हेल्दी या अनहेल्दी श्रेणी में आते हैं। इसके बावजूद प्रवक्ता ने दावा किया- ‘जिम्मेदार कंपनी के तौर पर हम अपने ग्राहकों को पारदर्शी तरीके से विभिन्न जानकारियों से अवगत कराते रहते हैं।’

नियम कड़े हों तो नेस्ले के कई उत्पाद अनहेल्दी: डॉ. गुप्ता

‘इंटरनेशनल बेबी फूड एक्शन नेटवर्क’ के रीजनल को-ऑर्डिनेटर डॉ. अरुण गुप्ता कहते हैं- नेस्ले अपने उत्पाद पर इस बात का जिक्र क्यों नहीं करती कि वह हेल्दी है या अनहेल्दी। दूध के अलावा कोई भी दो उत्पादों से मिलाकर बनने वाला खाद्य पदार्थ अल्ट्रा प्रोसेस्ड होता है।

वैश्विक गाइडलाइन के मुताबिक अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड सेहत के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में भारत में बिकने वाले नेस्ले के ज्यादातर उत्पाद अनहेल्दी श्रेणी में आते हैं। लेकिन, भारत में अब तक अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को लेकर अभी तक कोई नियमन नहीं है। कंपनियां इसका फायदा उठा रही हैं।

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