• Hindi News
  • National
  • Dinesh Trivedi BJP, Dinesh Trivedi Quits TMC, Mamata Banerjee, West Bengal, Election Date, West Bengal Assembly Election 2021, Assembly Election 2021 News, Bengal Poll Update, Bharatiya Janata Party

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी

  • कॉपी लिंक
  • जब हमने पार्टी की शुरुआत की थी, हमारे पास 5,000, 7000 रु. भी नहीं होते थे, आज सैकड़ों करोड़ रु. कंसल्टेंट (प्रशांत किशोर) को दे रही हैं, ये पैसा किसका है?

40 साल से राजनीति में शुमार दिनेश त्रिवेदी चौथी बार पार्टी बदल रहे हैं। राजनीति की शुरुआत जनता पार्टी से की थी। वहां 8 साल रहे। फिर कांग्रेस, वहां 10 साल रहे। उसके बाद TMC, वहां 22 साल रहे। और अब भाजपा। यहां कल ही आए हैं।

तृणमूल में ममता के सबसे करीबियों में शुमार थे। मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली UPA सरकार में रेल मंत्री भी रहे। याद ही होगा 2012 के रेल बजट के बाद ऐसा कोहराम मचा कि पद से हटा दिए गए।

दिनेश हाल तक TMC के राज्यसभा सांसद थे। 12 फरवरी को चलती राज्यसभा में TMC छोड़ने की घोषणा कर दी। तय था भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं, लेकिन थोड़ी देर हो रही थी। आखिरकार 6 मार्च को दिल्ली के भाजपा ऑफिस में सबके सामने पार्टी का पर्चा और अंगोछा दोनों हासिल किया। इसके बाद हमने उनसे सीधी बात की। आप भी पढ़िए…

सवाल: अमेरिकी थिंक टैंक फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट में भारत के स्टेटस को ‘स्वतंत्र’ से घटा कर ‘आंशिक स्वतंत्र’ कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर भारत की छवि ऐसी बन रही है कि भारत का लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। ऐसे माहौल में आप केंद्र में सत्ताधारी पार्टी में जा रहे हैं?
जवाब:
देश के बारे में आम जनता क्या सोचती है, फर्क इससे पड़ता है न कि कोई और क्या सोचता है इससे। मेरा कहने का मतलब है कि देश की स्थिति क्या है यह जानने के लिए आम जनता के पास जाइये। तब सही छवि आपके सामने आएगी। हमें अपनी जनता पर भरोसा करना चाहिए न कि किसी रिपोर्ट पर।

सवाल: आप जनता की बात कर रहे हैं तो किसानों को कैसे भूल सकते हैं? किसान आंदोलन का सौवां दिन भी बीत गया। सरकार किसानों की तो नहीं सुन रही है…
जवाब: लोकतंत्र है, आंदोलन का अधिकार तो सबको है। लेकिन सवाल उठता है कि अगर आप सरकार के ऊपर बंदूक रखकर बोलें कि या तो ‘माई वे या तो हाईवे’ यानी आप वही करें जो हम चाहते हैं… ऐसे तो नहीं होता है। लोकतंत्र ऐसे नहीं चलता। सरकार ने किसानों से कई बार बात की। यहां तक कि किसानों से इस बिल को 18 महीने तक ‘कोल्ड स्टोरेज’ में रखने, यानी लागू न करने की बात भी कही, पर इस बात पर भी आंदोलनकारी टस से मस नहीं हुए।
आंदोलनकारी तो किसी रास्ते पर अमल करने को तैयार ही नहीं। यहां तो सरकार के सिर पर बंदूक रखकर अपनी पूरी बात मनवाने की जिद ठान ली गई है। सरकार अगर ऐसे सबकी बातें मानती रही तो फिर इसके बाद कोई और यही रवैया अपनाएगा, उसके बाद कोई और… और फिर यह सिलसिला चलता रहेगा।

सवाल: जब आपने इस्तीफा दिया था तो उस वक्त कहा था कि पार्टी के भीतर बहुत भ्रष्टाचार और हिंसा है। लेकिन यह सब तो काफी पहले से चल रहा है। इसे समझने में इतना वक्त क्यों लगा?
जवाब: समझने में वक्त नहीं लगा, मैंने वक्त दिया। मैंने बहुत कोशिश की, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। जब पार्टी बनी थी तब आदर्श कुछ और थे। उस वक्त जनता सर्वोपरि थी। लेकिन जब सरकार आई तो ‘मां, मानुष, माटी’ केवल एक सियासी स्लोगन बनकर रह गया और सत्ता सर्वोपरि हो गई। आज तृणमूल बस एक परिवार की पार्टी बनकर रह गई है। जब हमने पार्टी की शुरुआत की थी, हमारे पास 5,000, 7000 रु. भी नहीं हुआ करते थे। दिल्ली भेजने के लिए भी किसी को पैसे नहीं होते थे। आज आप सैकड़ों करोड़ रु. एक कंसल्टेंट (प्रशांत किशोर) को दे रही हैं। ये पैसा किसका है? जनता का ही है न!

सवाल: ममता बनर्जी ने कई बार यह कहा कि बंगाल की पूर्व सत्ताधारी वामपंथी सरकार के द्वारा बहुत हिंसा हुई, लेकिन सत्ता में आते ही उन पर भी हिंसा करने, सियासी हत्याएं करवाने के आरोप लगने लगे। क्या ममता अब इतनी बदल गई हैं?
जवाब:
जनता के बीच CPM के खिलाफ बहुत नाराजगी थी। ममता में जनता को अपना विकल्प दिखा। लेकिन हुआ यह कि सरकार बदली, लेकिन व्यवस्था नहीं। जैसी व्यवस्था CPM की थी, आज उससे भी बदतर हो गई। CPM के समय तो यह था कि एक आदमी को या पार्टी को पैसा दो तो वहीं सब रफा-दफा हो जाता था। लेकिन अब तो भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि एक को पैसा दो तो चार और गुंडे खड़े हो जाते हैं।
मेरे पास मेरे दोस्त का एक मैसेज आया। उसने बताया कि वह साईं बाबा का मंदिर बना रहा है। बस क्या था, उसके पास चार गुंडे आ गए 15 लाख रु. मांगने। कहा पैसा दो या काम बंद करो। और यह मैं ममता जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की विधानसभा सीट की बात कर रहा हूं। अब राज्य में खुलेआम कट मनी जिसे तोलेबाजी कहते हैं, का चलन चालू है।
मैंने अपने दोस्त को कहा कि बस दो महीने रुक जाओ, फिर यह सब नहीं चलेगा। आज जब हमने कहा TMC में हमारा दम घुट रहा था, तो मैंने अपने अकेले की नहीं, बल्कि पूरी जनता की बात कही। TMC के कई सहयोगियों ने मुझे बधाई दी और कहा कि आप में दम था तो आप चले गए हम कहां जाएं? मैंने कहा आप भी दम दिखाओ और आ जाओ।

सवाल: ऐसा कहा जा रहा है कि बंगाल की लड़ाई दीया और तूफान की है। दीया ममता हैं और तूफान भाजपा है। आज पश्चिम बंगाल का चुनाव उसी दिशा में जा रहा है…
जवाब: तूफान कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि जनता लाती है। दीया अंधेरा मिटाता है। यहां अगर हम TMC की बात करें, ममता की बात करें तो वो दीया तले का अंधेरा है।

सवाल: एक बात तो माननी पड़ेगी कि ममता अपना दम तो दिखा रही हैं, चुनौती तो पेश कर रही हैं। उनमें सामना करने की क्षमता है। नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का निर्णय भी सीधी चुनौती ही है। आप क्या सोचते हैं?
जवाब: दम क्या होता है? ममता अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर नंदीग्राम से चुनाव लड़ रही हैं। पूरा राज्य तो छोड़िए, उनकी विधानसभा सीट में जाकर पूछेंगी तो पता चलेगा कि आज ममता से लोग कितने नाराज हैं।

दरअसल ममता बनर्जी अपना आत्मविश्वास खो चुकी हैं। इसी वजह से चुनाव में उन्हें अपना आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए एक सलाहकार की जरूरत पड़ी है। चुनाव रणनीतिकार की जरूरत पड़ती है। हम जब 2011 में चुनाव लड़ रहे थे तब तो किसी चुनाव रणनीतिकार या फिर कंसल्टेंट की जरूत नहीं पड़ी। तब न पैसा था और न ही गुंडों की ताकत, लेकिन जनता हमारे साथ थी। आज गुंडे भी हैं, पैसा भी है तब भी उन्हें एक कंसल्टेंट की जरूरत पड़ती है। आखिर क्यों?

सवाल: लोग कह रहे हैं कि आपका अभिषक बनर्जी के साथ ईगो टकरा गया। इसलिए आपने पार्टी छोड़ी?
जवाब:
देखिए हम नादान तो नहीं हैं। जब हम सार्वजनिक जीवन में होते हैं तो ईगो जैसा कुछ भी नहीं होता। आप मुझसे मत पूछिए जनता से पूछिए जाकर। जनता कह रही है कि एक व्यक्ति जो शरीफ था, पढ़ा-लिखा था, अब वह भी चला गया। आज पार्टी की जो स्थिति है उसमें कोई शरीफ आदमी नहीं रह सकता।

सवाल: अगर ममता जीत जाती हैं तो जनता के बीच क्या संदेश जाएगा?
जवाब:
जनता को आज ममता की भाषा पसंद नहीं आ रही। ममता ने आज जो गाली-गलौच की भाषा अपनाई है, यह बंगाल की संस्कृति नहीं है। आज बंगाल में लोगों में (भाजपा के आने से) एक उम्मीद जागी है। खुशी की लहर है। उन्हें लग रहा है कि एक विकल्प मिला है। बंगाल की संस्कृति ‘सभ्य’ है।
मंच पर चढ़कर रवींद्रनाथ टैगोर या फिर रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद की पंक्तियां पढ़कर खुद को सभ्य या सुसंस्कृत दिखाने का दिखावा सबको समझ में आता है। बंगाल की संस्कृति और सभ्यता के विपरीत जाकर चुनाव के दौरान स्तर से गिरकर बयानबाजी को जनता देख रही है। बंगाल एक सुसंस्कृत राज्य है। चरित्र और भाषा में भी सभ्यता और संस्कृति अपनानी होगा।

सवाल: बंगाल में भाजपा भी ध्रुवीकरण की ही सियासत कर रही है। जय श्रीराम के नारे को चुनाव का मंत्र बना दिया है। यह भी तो संस्कृति के खिलाफ ही है न?
जवाब:
जय श्रीराम का नारा लगाने में दिक्कत क्या है? हरे राम, हरे कृष्ण का आंदोलन कहां से शुरू हुआ? चैतन्य महाप्रभु कहां से आए? आज आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, वहां हिंदुओं को दबाया जा रहा है। हिंदू खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा है।
वोट बैंक की राजनीति किस कदर राज्य में हावी है, उसका एक उदाहरण मैं बताता हूं। मुझसे मेरी विधानसभा सीट बैरकपुर के एक व्यक्ति ने सवाल पूछा कि बंगाल में दो कानून क्यों हैं? एक अल्पसंख्यक के लिए और एक पूरे राज्य के लिए। अगर मुसलमान बाइक में बैठकर जाते हैं तो उन्हें हेलमेट की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन हिंदू जाता है तो पड़ती है। सरस्वती पूजा या दुर्गा मूर्ति विसर्जन के लिए कोर्ट में जाना पड़ता है। आखिर क्यों? हालांकि आज ममता से मुसलमान भी नाराज है। वह यह कह रहा है कि आपने हमारा विकास करने की बजाए हमें सिर्फ वोट बैंक बना दिया।

सवाल: आप इतने सालों तक TMC में रहे। एक ऐसी पार्टी जो भाजपा को सांप्रदायिक और खुद को धर्मनिरपेक्ष कहती है, सामंजस्य बिठाने में कुछ समय लगेगा?
जवाब: यह कहना कि भाजपा सांप्रदायिक पार्टी है और TMC धर्मनिरपेक्ष, बिल्कुल गलत है। धर्मनिरपेक्षता यह तो नहीं होती कि आप हिंदुओं का तिरस्कार करें और किसी अन्य धर्म के हैं तो फिर ठीक है। मंच पर जाकर आप अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण करें… धर्मनिरपेक्षता का मतलब होता है कि आप हर धर्म के साथ समान व्यवहार करें। जैसा कि भारत की भावना में ही है। सभी धर्मों का बराबर आदर।
दरअसल, यह पार्टी अब एक कंसल्टेंट (प्रशांत किशोर) के हाथ में चली गई है। हमने जिस पार्टी को बनाया था, ममता ने तो उस पार्टी को बेच दिया। पूछना तो यह चाहिए कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो इतने लोग पार्टी छोड़कर जा रहे हैं?

सवाल: आप जनता पार्टी में थे, कांग्रेस में थे, TMC में रहे। मतलब एक लंबा समय राजनीति में अलग-अलग पार्टियों में गुजारा। नरेंद्र मोदी में ऐसी क्या खास बात है जो उन्हें दूसरों से अलग करती है?
जवाब: भरोसा। जनता उन पर भरोसा करती है। दुनिया में कोई ऐसा नेता आज नहीं है जो कहे, आज सबको दीया जलाना है और लोग दीये जलाने लगें। आपने देखा न! आज जनता को यह भरोसा है कि मोदी देश और हमारी सुरक्षा करने में समर्थ हैं। जनता जानती है कि मोदी देश की सुरक्षा पर यह आंच नहीं आने देंगे।
अभिनंदन को वापस लाने का प्रकरण हो या फिर किसी देश को जवाब देने की बात हो, भारत कहीं पीछे नहीं हटता। इससे पहले तो बस लाल बहादुर शास्त्री ही थे, जिन्होंने कहा एक दिन का उपवास रखना है तो लोगों ने रखा।

खबरें और भी हैं…

Source link