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अनुज शर्मा/अमृतसरएक घंटा पहले

पंजाब के भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री अनिल जोशी। पार्टी का अनुशासन तोड़ने पर शो-कॉज नोटिस जारी किए जाने को लेकर उन्होंने खुलकर अपनी बात साझा की।

एक ओर किसान आंदोलन के चलते भाजपा नेताओं की मुश्किलें कम नहीं हो रही, वहीं पार्टी में टांग-खिंचाई भी बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। एक दिन पहले ही शो-कॉज नोटिस जारी किए जाने के बाद निशाने पर आए पंजाब के पूर्व मंत्री अनिल जोशी का रवैया एकदम तल्ख है। उनका कहना है कि कुछ नेताओं ने पद पाने और हासिल पद को बचाए रखने के लिए हाईकमान को गलत जानकारी दी है, जिससे न सिर्फ किसान तबका, बल्कि पार्टी के वर्कर्स भी नाराज हैं। यहां तक कि दैनिक भास्कर के साथ खास बातचीत में जोशी ने पार्टी की प्रदेश इकाई के इस्तीफे तक की मांग उठा दी। अनुशासनहीनता का आरोप लगने के बाद इस संबंध अनिल जोशी से हुई वार्ता के कुछ महत्वपूर्ण अंश इस प्रकार से हैं…

पार्टी की कार्यकारिणी की तरफ से आपको नोटिस जारी किया गया है?

पार्टी वर्करों की बात और किसानों के मुद्दे पर उनके साथ खड़ा होना पार्टी के खिलाफ होना नहीं है। इस नोटिस को सिर्फ जरिया बनाया गया है। काफी समय से उन्हें पार्टी से हटाने के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं, ताकि पदों पर बैठे लोग अपना रास्ता साफ कर सकें। मेरे पिता पुराने स्वयं सेवक थे। वह आतंकवाद की भेंट चढ़ गए। 1984 में मैंने भी संघ ज्वाइन किया। इसके बाद सन 2000 में भाजपा ज्वाइन की। मैंने पार्टी की मर्यादा को बनाए रखने के लिए गोलियां भी खाई। आज वो लोग मुझसे जवाब मांग रहे हैं, जो कभी अपने बूथ में भी नहीं बैठे। पार्टी में उच्च पदों पर बैठे लीडर पार्षद तक के चुनाव हार चुके हैं और यहां तक कि मुझे हराने में भी उन्हीं का हाथ रहा है। एक साजिश रची जा रही है, ताकि मैं बीच से निकल जाऊं और उनके पद बचे रहें।

आप पर पार्टी के खिलाफ जाकर किसानों का साथ देने का आरोप है?

किसान कभी भी इन कानूनों के हक में नहीं थे। पंजाब में पहले से ही गेहूं और चावल पर MSP मिल रहा है। पूरी फसल सरकार उठा लेती है। हमें भी MSP से भी कोई दिक्कत नहीं थी। ADC के समक्ष मामले उठाए जाने वाले कानून के खिलाफ ही किसान आवाज उठा रहे हैं। अगर समय पर यह जानकारियां केंद्र को दी होती तो आज पंजाब में यह हालात ना होते।

अश्वनी शर्मा के नेतृत्व को कहां तक आंकते हैं?

प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा की अगुवाई और उनके आसपास रहने वाले लोगों की नीतियों के कारण ही पंजाब में भाजपा का बुरा हाल है। अपने हलके में निकलने वाले विधायकों पर हमले हो रहे हैं। वर्करों के साथ बुरा व्यवहार हो रहा है। यह सब केंद्र को दी गई गलत जानकारियों का ही तो नतीजा है। ऐसे लोगों पर आधारित पंजाब इकाई की तरफ से पार्टी हाईकमान को गलत जानकारी दी जाती रही है, जिससे किसान वर्ग के साथ-साथ अपने वर्कर्स भी नाराज हैं।

…तो ऐसे में पार्टी के सियासी भविष्य पर आपकी क्या राय है?

अभी भी हालात बिगड़े नहीं हैं। अगर सरकार किसानों की बात मान लेती है तो पंजाब में हालात ठीक हो जाएंगे। मेरे पास पूरा रोडमैप तैयार है। अगर पार्टी कहे तो मैं पूरा मैप सांझा करने को तैयार हूं। मेरी बात मान ली जाए तो इसके बाद मैं पार्टी को पंजाब में जीत दिलवा सकता हूं।

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