फिल्म के ट्रेलर को अच्छी प्रतिक्रियाएं मिली हैं। अब फिल्म भी रिलीज को तैयार है, कैसी उम्मीदें हैं?

फिल्म के ट्रेलर को अच्छी प्रतिक्रियाएं मिली हैं। अब फिल्म भी रिलीज को तैयार है, कैसी उम्मीदें हैं?

फ़िल्म को इमोशनल स्तर पर जैसी प्रतिक्रियाएं मिली है, उसकी मुझे खुशी है। लोगों ने ट्रेलर से फ़िल्म के भाव को पकड़ा है, चाहे वह गुस्से का भाव हो, नारी शक्ति का हो या न्याय का हो। यह फिल्म मेरे लिए बहुत अहमियत रखती है।

फिल्म रिलीज़ के कुछ दिनों पहले ही देश के कई शहरों में रेप की घटनाएं सामने आई हैं। एक समाज के तौर पर हम कहां जा रहे हैं? आपकी टिप्पणी।

फिल्म रिलीज़ के कुछ दिनों पहले ही देश के कई शहरों में रेप की घटनाएं सामने आई हैं। एक समाज के तौर पर हम कहां जा रहे हैं? आपकी टिप्पणी।

हमें यही समझने की ज़रूरत है कि एक महिला के तौर पर हमें खुद अपने आप की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने की ज़रूरत है। अपने आस पड़ोस से अवगत होने की ज़रूरत है। सच तो यही है कि आज हम किसी पर विश्वास नहीं कर सकते। मर्दानी 2 से हम जो संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, वह यही है कि जो क्रिमिनल है, वह किसी भी उम्र, किसी भी तबके, किसी भी चेहरे का हो सकता है। किसी के दिमाग में क्या चल रहा है, यह जानना समझना बहुत ही मुश्किल है। इसीलिए आज के समाज में एक महिला के तौर पर हमें खुद हर रूप में सक्षम बनाना पड़ेगा। जितनी जल्दी हम नारी शक्ति को पहचान लेंगे, उतना बेहतर है। और एक समाज के तौर पर हम कहाँ बढ़ रहे हैं, इस पर मेरा यही सोचना है कि कोई भी इंसान जन्म लेते ही रेपिस्ट नहीं बन जाता, बल्कि एक समाज ही उसकी मानसिकता में बदलाव लाता है। एक लड़का अपने घर में यदि अपने पिता को अपनी माँ पर हाथ उठाते देखता है, तो उसे लगता है कि वह भी ऐसा किसी औरत के साथ कर सकता है। एक तरह से इन सब की शुरुआत घर से, आस पड़ोस से ही शुरू होती है। अब वक्त और ज़रूरत है कि हम सब अपने बच्चों की सही परवरिश की जिम्मेदारी उठाएं। अपनी लड़कियों को हम क्या सिखा रहें, इसके साथ अपने बेटे को क्या सिखा रहे हैं, यह भी समझने की ज़रूरत है। परिवार और स्कूल ही वो पहली सीढ़ी होती है, जहाँ से बच्चे की एक सोच बनती है।

मर्दानी से मर्दानी 2 का सफर तय करना कैसा रहा?

मर्दानी से मर्दानी 2 का सफर तय करना कैसा रहा?

इस सफर का क्रेडिट मैं अपने निर्देशक गोपी को देना चाहूंगी। मर्दानी में मेरा किरदार क्राइम ब्रांच ऑफिसर का था, वहीं इस फ़िल्म में मैं एसपी बनी हूँ और खाकी वर्दी में नज़र आ रही हूं। खाकी वर्दी की अलग ही चुनौती होती है। शिवानी शिवाजी रॉय किरदार वही है, लेकिन ओहदा बदल गया है, और इस ओहदे की वजह से कई बातें बदल गयी हैं।

इस किरदार को निभाने में क्या चैलेंज रहे?

इस किरदार को निभाने में क्या चैलेंज रहे?

सबसे बड़ा चैलेंज मेरे लिए जो था, वह था अंडर वाटर डाइविंग का। इसके लिए स्विमिंग सीखना पड़ा मुझे, जिसका खौफ बचपन से मेरे अंदर था। मर्दानी 2 के दौरान मैंने इस खौफ से लड़ा है। इस फ़िल्म में एक अंडर वाटर एक्शन सीक्वेंस है, जो मैंने खुद किया है। पहले तो मैंने अपने निर्देशक को बहुत मनाने की कोशिश की ताकि मुझे स्विमिंग ना सीखना पड़े। लेकिन उन्होंने इरादा नहीं बदला। अंततः मैंने 7 दिनों में स्विमिंग सीखा।

मर्दानी से मर्दानी 2 के बीच 5 साल का इंतजार रहा। कोई खास वजह?

मर्दानी से मर्दानी 2 के बीच 5 साल का इंतजार रहा। कोई खास वजह?

फ़िल्म के राइटर और निर्देशक गोपी चाहते थे कि मर्दानी 2 जब भी आये ऐसे विषय को ले कर आये जो मर्दानी के टक्कर की हो। मर्दानी में हमने चाइल्ड ट्रैफिकिंग (child trafficking) जैसा अहम मुद्दा उठाया था, और एक संदेश देने की कोशिश की थी, एक चेहरा दिखाने की कोशिश की थी ये कितना गंभीर है। हमने लोगों जागरूक करने की कोशिश की थी। हम सिर्फ सीक्वल बनाने के ख्याल से सीक्वल नहीं बनाना चाहते थे।

बॉलीवुड फिल्मों में तो दोषी को तुरंत ही सजा दे दिया जाता है। लेकिन असल में ऐसा कम ही देखा गया है। आपके हिसाब से रेप के दोषियों को क्या सज़ा मिलनी चाहिए?

बॉलीवुड फिल्मों में तो दोषी को तुरंत ही सजा दे दिया जाता है। लेकिन असल में ऐसा कम ही देखा गया है। आपके हिसाब से रेप के दोषियों को क्या सज़ा मिलनी चाहिए?

जिस तरह के क्राइम और क्रिमिनल की बात आप कर रहे हैं, उसके लिए कोई भी सज़ा बहुत कम है। किस देश में क्या सज़ा मिलती है और क्या मिलनी चाहिए इसपर मैं टिप्पणी नहीं करना चाहूँगी। लेकिन ये करने वाले 18 साल से कम के हों या 18 से ज़्यादा के, इन्हें सजा बिल्कुल मिलनी चाहिए और गंभीर से गंभीर सजा मिलनी चाहिए।

असल जीवन में आप कितनी मर्दानी हैं?

असल जीवन में आप कितनी मर्दानी हैं?

मैं बचपन से मर्दानी रही हूं। हम माँ दुर्गा की पूजा करते हैं, जिन्हें महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। हमने हमेशा देखा है कि माँ दुर्गा दस हाथों के साथ महिषासुर का वध कर रही हैं। एक राक्षस उनके कदमों पर है। हमने हमेशा से नारी शक्ति की पूजा की है। बचपन से ही मेरा वातावरण ऐसा रहा है, जहाँ लड़कियों को किसी भी तरह लड़कों से कम नहीं समझा जाता है। इसीलिए मैंने हमेशा अपने आप को पावरफुल महसूस किया है। और इसीलिए मैं कहती हूँ कि देश में यदि हमें जल्द से जल्द बदलाव देखना है तो हमें अपने घर से शुरुआत करनी होगी।

बतौर निर्देशक गोपी पुथरन के साथ काम करना कैसा अनुभव रहा?

बतौर निर्देशक गोपी पुथरन के साथ काम करना कैसा अनुभव रहा?

एक राइटर और एक निर्देशक के तौर पर मैं गोपी की बहुत इज़्ज़त करती हूं और वो भी मेरी इज़्ज़त करते हैं। गोपी मर्दानी के वक़्त भी सेट पर रहे थे इसीलिए हमारी आपसी समझ भी बहुत अच्छी है। और गोपी हों या प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा इनमें सबसे बात ये है कि ये सही सोच के साथ महिला संबंधित विषयों पर काम कर रहे हैं। इस फ़िल्म में ही कई सीन ऐसे हैं, जिसे देखकर आप समझ जाएंगे कि इनके मन में महिलाओं के लिए कितनी इज़्ज़त है। इनके साथ काम करना हमेशा बेहतरीन होता है।


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