लोनावला की तरह लंबा ट्रैवल

लोनावला की तरह लंबा ट्रैवल

बिग बॅास 13 लोनावला से मुंबई आ गया है। लेकिन लोनावला को शो से काफी फायदा हो जाता था। कलर्स चैनल की टीम बढ़ी संख्या में वहां रहती थी, तो हर बार लोनावला का नाम आता । इससे वहां के पर्यटन में इजाफा हो जाता। लोनावला में तीन महीने पूरी टीम का रहने से लागत बढ़ जाती थी। गोरेगांव फिल्म सिटी आने से आराम होगा। जो स्टार्स प्रमोशन के लिए आयेंगे उन्हें लोनावला की तरह लंबा ट्रैवल नहीं करना होगा।

गोरेगांव में सेट होने से कई फर्क नहीं

गोरेगांव में सेट होने से कई फर्क नहीं

मुंबई में रहने से भी कंटेस्टेंट पर कोई फर्क नहीं होगा। उन्हें वहीं अनुभव और अहसास होगा जो लोनावला में होता है। घर के अंदर बंद होने पर वैसा ही लगता है। मराठी बिग बॅास भी वहीं पर शूट हुआ है। आप न्यूयॉर्क में चले जाओ और एक घर में बंद हो जाओ। वहीं अहसास होगा।

मुलाकात हुई तो कहा बिग बॅास में रहना अद्भुत है

मुलाकात हुई तो कहा बिग बॅास में रहना अद्भुत है

अभी तक मैंने जितने भी कंटेस्टेंट को देखा है या बाहर जिनके साथ शो के बाहर मुलाकात हुई है, तो उनका कहना यही रहता है कि उनके लिए एक अलग और अद्भुत अनुभव होता है बिग बॅास के घर में रहने का। घर के अंदर में रहना काफी मुश्किल है। खाना, नहीं, एक बेड शेयर करना। बाथरूम को शेयर करना। ये सब काफी मुश्किल है। इस बार भी गेम काफी दिलचस्प होगा।

बिग बॅास में कोई हद पार नहीं होती

बिग बॅास में कोई हद पार नहीं होती

बिग बॅास के फॉर्मेट को समझना मुश्किल है। अगर कोई कंट्रोवर्सी हुई तो शो के लिए ठीक नहीं। लेकिन शो में अगर कुछ ना भी हो तो वो भी सही नहीं है। हमारे घर में आज भी फिल्म या टीवी में कोई किसिंग सीन हो तो हम यहां-वहां देखने लगते हैं। ये सभी के घर में होता होगा। बिग बॅास में कई बार रोमांस दिखाया जाता है लेकिन कोई हद पार नहीं होती है।

मेरी वजह से ये शो नहीं चलता है

मेरी वजह से ये शो नहीं चलता है

कई बार शो में किसी को देख कर लगता है कि हम भी जीवन में कुछ स्थिति पर ऐसे रिएक्ट कर सकते हैं। तो कभी किसी कंटेस्टेंट को देखकर लगता है कि ऐसा नहीं करना चाहिए। मुझे सीखने को मिलता है। सच कहूं तो ये शो मेरी वजह से नहीं चलता। बल्कि कंटेस्टेंट की वजह से टॅाप पर रहता है। अगर वो सोमवार से शुक्रवार कुछ करेंगे नहीं तो हमें शनिवार और रविवार के लिए कंटेंट नहीं मिलेगा। इस शो में सबकी मेहनत है।

मैं अपने इस ट्रेन के सफर से चिढ़ चुका था

मैं अपने इस ट्रेन के सफर से चिढ़ चुका था

मुंबई मेट्रो से आने के कारण मेरी एक ट्रेन के सफर की याद ताजा हो गई। कॅालेज के समय मेरी एक दोस्त हुआ करती थीं। वो टाउन में रहती थीं। मैं उन्हें छोड़ते हुए रात की आखिरी लोकल पकड़ता था। लेकिन ब्रांदा से पहले सो जाता और सीधा विरार में जाकर मेरी आंख खुलती थी। फिर विरार से दूसरी लोकल पकड़ता तो फिर सो जाता और सीधा चर्चगेट में आंख खुलती थी। ऐसा करीब 20 बार हुआ है। मैं इससे काफी चिढ़ चुका था।


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