शाहरुख और आयुष्मान का रोमांस करने का तरीका अलग है

शाहरुख और आयुष्मान का रोमांस करने का तरीका अलग है

बकौल नकुल, इस वेब सीरीज से फिर से मैं रोमांटिक किरदार में वापसी कर रहा हूं। लेकिन ये इश्कबाज से भिन्न है। जैसे,शाहरुख खान की फिल्मों में अलग तरह का रोमांस होता है। जो आयुष्मान खुराना करते हैं वो अलग तरह का रोमांस है। ठीक इसी तरह मेरे सभी किरदार का रोमांटिक पहलू अलग है।

इश्कबाज एक हाई बजट फिल्म की तरह रहा है। वहां हेलीकॉप्टर से शिवाय की एंट्री होती है। रोमांस था शिवाय में लेकिन उसका जाहिर करने का तरीका सीधा नहीं था। रोमांस भी कई लेयर का होता है। मैंने कभी ऐसा किरदार नहीं निभाया जो दो टाइमलाइन में है। एक यंग है और एक मेरी असली उम्र से थोड़ा ज्यादा है। मेरे लिए ये नया था। ये अलग है। यहां प्यार और दोस्ती की दिलचस्प कहानी है।

शिवाय की इमेज को तोड़ना है

शिवाय की इमेज को तोड़ना है

मैं हर प्रोजेक्ट से पहले मैं खुद पर काम करता हूं। किरदार से कनेक्ट करने की कोशिश करता हूं। हाल ही में मैंने अनुराग कश्यप के साथ एक शॅार्ट फिल्म की। वहां से नई चीजें सीखी। मेरे कहने का मतलब ये है कि हर नई चीज कुछ दे जाती है। जो आगे काम आती है।

मैंने इश्कबाज में लार्जर देन लाइफ के हीरो का रोल प्ले किया है। अब इसे तोड़ने का समय आ गया है। लोग पसंद करते हैं। लेकिन उस किरदार की इमेज को तोड़कर कुछ नया दो तो उम्मीद करते हैं कि दर्शक उसे भी पसंद करेंगे। वो चैंलेज होता है एक कलाकार के लिए।

डिजिटल में संक्षिप्त काम होता है

डिजिटल में संक्षिप्त काम होता है

वेब में शार्ट फॅार्मेट कंटेंट बनने लगा है। टीवी में कहानी का सफर लंबा होता है। मेरा पिछला शो इश्कबाज 750 एपिसोड चला। लाजमी हैं कि एक ही तरह का काम करते हुए एक पैटर्न में आ जाते हैं।

हमारे काम में रोज नया इमोशन दिखाना होता है। किरदार भले पुराना होता है उसकी भावना हर एपिसोड में नई होती है। आप मशीन नहीं हैं। डिजिटल में आप 10 एपिसोड शूट करते हैं संक्षिप्त में करते हैं। शो खत्म हुआ आपने प्रमोट किया फिर वह रिलीज हो जाता है। वक्त मिलता है आपको। टीवी में समय की कमी है।

जो बिकता है वही बेचते हैं..

जो बिकता है वही बेचते हैं..

कई बार ये सुनने मिलता है कि टाइपकास्ट हो रहे हैं।टाइप कास्ट होने के लिए पहले कास्ट होना जरूरी है। आज के दौर में आप अगर अच्छे प्रोजेक्ट के लिए कास्ट हो रहे हैं, तो वो समस्या नहीं होनी चाहिए। कई लोग ऐसे हैं जो उस जगह पहुंचना चाहते हैं जहां पर मैं हूं। खासकर टीवी में। मैं इसे निगेटिव मैं नहीं ले लेता हूं।

मैंने वो समय देखा है जब मैं एक्टर बनने की कोशिश कर रहा था, आज मुझे काम मिल रहा है। मुझे कभी कभी लगता है कि यार कैसे हो गया। आज से दस साल पहले मेरे लिए ये सपना था। वैसे भी जो बिकता है आप वही बेचते हैं। अगर मेरा रोमांस बिकता है तो वह बेचते हैं। हालांकि वो वक्त भी आएगा जब मैं किसी ऐसे किरदार के लिए इंटरव्यू दूंगा जो सबसे अलग होगा।

फैंस से मुझे ये उम्मीद नहीं है..

फैंस से मुझे ये उम्मीद नहीं है..

टीवी पर दो से तीन साल चले जाते हैं। आज बतौर कलाकार कई पर्याय सामने हैं। हां, कोई समय सीमा में तय काम मिले तो टीवी के लिए करूंगा। मैं अपने फैंस का सम्मान करता हूं। लेकिन पुराना काम पसंद आया इसका मतलब ये नहीं है कि नया काम भी पसंद आएगा। हर नए काम में कुछ कमाल करके फैंस को जीतना पड़ता है।मैं ये उम्मीद नहीं करता कि पुराने काम के बलबूते मेरे नए काम को देखें। अच्छे काम के लिए समय लगता है। इंतजार का फल मीठा होगा।


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